गोपेश्वर, चमोली।पंच केदारों में चतुर्थ केदार भगवान रुद्रनाथ की उत्सव डोली रविवार को अपने शीतकालीन प्रवास स्थल गोपीनाथ मंदिर, गोपेश्वर से विधि-विधान के साथ मूल धाम रुद्रनाथ के लिए रवाना हो गई। डोली के प्रस्थान के साथ ही पूरा गोपेश्वर नगर “बम-बम भोले” और “जय बाबा रुद्रनाथ” के जयकारों से गूंज उठा।
सुबह से उमड़े श्रद्धालु
रविवार सुबह से ही गोपीनाथ मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भीड़ जुटनी शुरू हो गई थी। पुजारियों और हक-हकूकधारियों ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ भगवान रुद्रनाथ की विशेष पूजा-अर्चना की। करीब 9 बजे अभिजीत मुहूर्त में भगवान रुद्रनाथ की चल विग्रह डोली को फूल-मालाओं से सजाकर मंदिर परिसर से बाहर लाया गया।
सेना के बैंड ने बांधा समां
शोभायात्रा की भव्यता देखते ही बन रही थी। सबसे आगे भारतीय सेना के जवानों का बैंड देशभक्ति और भक्ति धुनों से माहौल को भक्तिमय बना रहा था। बैंड की मधुर धुनों पर श्रद्धालु नाचते-गाते चल रहे थे। डोली के साथ छत्र, चंवर, निशान और पारंपरिक वाद्य यंत्रों की गूंज पूरे नगर में सुनाई दे रही थी।
पहले पड़ाव के लिए रवाना
गोपेश्वर मुख्य बाजार, पुलिस लाइन, सगर गांव होते हुए डोली अपने पहले पड़ाव सगर गांव के लिए रवाना हुई। रास्ते भर स्थानीय लोगों ने घरों की छतों और सड़कों पर खड़े होकर डोली पर पुष्प वर्षा की और आशीर्वाद लिया। महिलाएं मंगल गीत गाते हुए डोली के साथ चल रही थीं।
हजारों श्रद्धालु हुए शामिल
शोभायात्रा में चमोली जिले के अलावा रुद्रप्रयाग, पौड़ी, टिहरी और देश के विभिन्न हिस्सों से आए करीब 5 हजार से ज्यादा श्रद्धालु शामिल हुए। प्रशासन ने सुरक्षा और यातायात के पुख्ता इंतजाम किए थे।
कब खुलेंगे कपाट
भगवान रुद्रनाथ की डोली विभिन्न पड़ावों ल्वींटी बुग्याल, पनार बुग्याल होते हुए 18 मई को अपने धाम रुद्रनाथ पहुंचेगी। परंपरा के अनुसार 19 मई ब्रह्ममुहूर्त में रुद्रनाथ मंदिर के कपाट ग्रीष्मकाल के लिए श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोल दिए जाएंगे। कपाट 6 महीने तक खुले रहेंगे।
DM-BKTC ने दी शुभकामनाएं
जिलाधिकारी चमोली संदीप तिवारी और बदरी-केदार मंदिर समिति के अधिकारियों ने डोली यात्रा की सफलता के लिए शुभकामनाएं दीं। BKTC उपाध्यक्ष किशोर पंवार भी इस मौके पर मौजूद रहे। उन्होंने कहा कि यात्रा को सुगम बनाने के लिए सभी व्यवस्थाएं पूरी कर ली गई हैं।
मान्यता
मान्यता है कि पंच केदारों में भगवान शिव के मुख के दर्शन चतुर्थ केदार रुद्रनाथ में होते हैं। यहां प्राकृतिक रूप से निर्मित शिवलिंग की पूजा होती है। शीतकाल में भारी बर्फबारी के कारण 6 महीने भगवान रुद्रनाथ गोपीनाथ मंदिर गोपेश्वर में विराजते हैं
