देहरादून: राजधानी देहरादून को साफ-सुथरा, सुंदर और देश का नंबर वन शहर बनाने के लिए जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने एक बेहद शानदार और अनूठी पहल की शुरुआत की है। कलेक्ट्रेट स्थित एनआईसी (NIC) सभागार से नगर निगम, नगर निकायों और कैंटोनमेंट बोर्ड के अफसरों के साथ वर्चुअल समीक्षा बैठक करते हुए डीएम ने जनता को सीधे व्यवस्था का हिस्सा बनने का न्योता दिया है।
अब देहरादून का कोई भी नागरिक अपने आसपास गंदगी, बंद स्ट्रीट लाइट या टूटी सड़कों की शिकायत सीधे जिला प्रशासन के सोशल मीडिया पेज पर फोटो और लोकेशन के साथ दर्ज करा सकता है।
फोटो खींचिए, लोकेशन डालिए और फेसबुक पर करिए टैग!
जिलाधिकारी ने जनपदवासियों से स्वच्छता अभियान में सक्रिय सहभागिता निभाने की अपील करते हुए एक बड़ा डिजिटल कदम उठाया है:
इन समस्याओं पर होगा एक्शन: यदि आपके क्षेत्र में कूड़ा, बंद स्ट्रीट लाइट, खराब यातायात सिग्नल, टूटे साइन बोर्ड, उखड़ी हुई सड़क या चोक नाली की समस्या है, तो आपको सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने की जरूरत नहीं है।
ऐसे करें शिकायत: इन समस्याओं की एक साफ फोटो खींचें, उसका सटीक विवरण और लाइव लोकेशन लिखें और सीधे ‘डीआईपीआर देहरादून’ (DIPR Dehradun) के ऑफिशियल फेसबुक या इंस्टाग्राम पेज पर टैग कर दें। डीएम ने साफ किया है कि इन सोशल मीडिया शिकायतों पर तुरंत और कड़ा एक्शन लिया जाएगा।
कूड़ा प्रबंधन की होगी ‘माइक्रो लेवल’ पर मॉनिटरिंग
बैठक में जिलाधिकारी ने शहर की सफाई व्यवस्था को लेकर लापरवाह अफसरों को आड़े हाथों लिया और कड़े निर्देश जारी किए:
ग्राउंड जीरो पर उतरें अफसर: डीएम ने दो टूक कहा कि अधिकारी सिर्फ दफ्तरों और एसी कमरों में बैठकर फाइलों पर समीक्षा न करें, बल्कि खुद ‘ग्राउंड जीरो’ पर जाकर वास्तविक स्थिति देखें।
शॉर्ट और लॉन्ग टर्म प्लान: नगर निगम, जिला पंचायत और कैंटोनमेंट बोर्ड को कूड़ा निस्तारण के लिए शॉर्ट टर्म और लॉन्ग टर्म व्यावहारिक कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए गए हैं।
गार्बेज पॉइंट्स का होगा परमानेंट इलाज: हर निकाय अपने क्षेत्र के उन डंपिंग पॉइंट्स (कूड़ा फेंकने वाली जगहों) को चिन्हित करेगा जहां रोजाना कचरा जमा होता है और उनका स्थायी (Permanent) समाधान सुनिश्चित करेगा। कूड़ा उठान की माइक्रो स्तर (बारीकी से) पर निगरानी की जाएगी।
बैठक में एनआईसी सभागार में एडीएम (वित्त एवं राजस्व) के.के. मिश्रा, एसडीएम डोईवाला अपर्णा ढोंडियाल समेत तमाम आला अफसर मौजूद रहे, जबकि बाकी निकायों के अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जुड़े।
जनता की अदालत: प्रशासन से सीधे सोशल मीडिया पर शिकायत करने की इस डिजिटल पहल पर आपकी क्या राय है?
अक्सर देखा जाता है कि लोग व्हाट्सएप या फेसबुक पर गंदगी की तस्वीरें तो पोस्ट करते हैं, लेकिन संबंधित विभाग तक वो बात नहीं पहुंच पाती। अब सीधे विभाग के पेज को टैग करने का विकल्प मिलना देहरादून की जनता के लिए एक बड़ी ताकत है।
क्या आपको लगता है कि इस ‘सोशल मीडिया टैगिंग’ सिस्टम से लापरवाह कर्मचारियों और अधिकारियों की पोल खुलेगी और काम तेजी से होगा?
