देहरादून। आर्थिक तंगी, दिव्यांगता और कर्ज के बोझ तले दबे एक परिवार के लिए जिला प्रशासन फरिश्ता बनकर सामने आया। ईस्ट पटेल नगर निवासी 100 प्रतिशत दिव्यांग संजीव कुमार और उनकी 65 प्रतिशत दिव्यांग पत्नी की फरियाद पर जिलाधिकारी सविन बंसल ने मानवीय संवेदनशीलता दिखाते हुए परिवार को बड़ी राहत दी है।

 

जिला प्रशासन ने सीएसआर फंड के माध्यम से संजीव कुमार का 64 हजार 915 रुपये का बकाया ऋण जमा कराया, जबकि रोजगार दोबारा शुरू करने के लिए रायफल क्लब फंड से 25 हजार रुपये की आर्थिक सहायता भी उपलब्ध कराई गई। साथ ही उनकी तीनों बेटियों को “प्रोजेक्ट नंदा-सुनंदा शिक्षा कवच” से जोड़ने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है, ताकि उनकी पढ़ाई प्रभावित न हो।

 

दरअसल, संजीव कुमार ने वर्ष 2018 में उत्तराखंड बहुउद्देशीय वित्त एवं विकास निगम से मोबाइल रिपेयरिंग की दुकान खोलने के लिए 50 हजार रुपये का ऋण लिया था। शुरुआती दौर में उन्होंने कई किश्तें भी जमा कीं, लेकिन वर्ष 2020 में कोरोना महामारी और लॉकडाउन के चलते उनका व्यवसाय पूरी तरह ठप हो गया। आर्थिक हालात इतने बिगड़ गए कि वे ऋण की बाकी किश्तें नहीं चुका सके।

 

ऋण अदायगी न होने पर निगम ने 64,915 रुपये की आरसी तहसील देहरादून भेज दी। परिवार केवल तीन हजार रुपये की पेंशन पर गुजर-बसर कर रहा था। हालत यह हो गई कि बेटियों की शिक्षा भी प्रभावित होने लगी। संजीव कुमार ने जिलाधिकारी के समक्ष पेश होकर बताया कि अमीन द्वारा तहसील जेल भेजने की धमकी दी जा रही है, जिससे पूरा परिवार मानसिक तनाव में जी रहा था।

 

मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी सविन बंसल ने तत्काल संज्ञान लिया और अधिकारियों को निर्देश दिए कि दिव्यांग परिवार की हरसंभव मदद की जाए। प्रशासन ने न सिर्फ पूरा बकाया ऋण जमा कराया, बल्कि परिवार के लिए रोजगार का नया सहारा भी उपलब्ध कराया।

 

जिलाधिकारी ने जिला कार्यक्रम अधिकारी, बाल विकास को निर्देशित किया कि परिवार की तीनों बेटियों को प्रोजेक्ट नंदा-सुनंदा के तहत शिक्षा सहायता उपलब्ध कराई जाए, ताकि आर्थिक संकट के बावजूद उनकी पढ़ाई जारी रह सके।

 

जिला प्रशासन की इस संवेदनशील पहल से एक जरूरतमंद परिवार को राहत और नई उम्मीद मिली है। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि जनसुनवाई में आने वाले ऐसे मामलों में संवेदनशीलता के साथ प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी, ताकि कोई भी जरूरतमंद सहायता से वंचित न रहे।

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