उत्तराखंड: उत्तराखंड में सड़क पर पैदल चलने वालों की सुरक्षा के लिए प्रदेश सरकार ठोस नीति बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है। प्रस्तावित नीति के तहत पैदल यात्रियों और गैरयांत्रिक वाहनों के लिए विशेष सुविधाएं विकसित की जाएंगी, साथ ही सुरक्षा मानक और नियमों के उल्लंघन पर जुर्माने का भी प्रावधान किया जाएगा।

यह पहल सुप्रीम कोर्ट द्वारा गत वर्ष राजशेखर बनाम केंद्र सरकार मामले में दिए गए निर्देशों के बाद की जा रही है। कोर्ट ने राज्यों को पैदल यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए स्पष्ट मानक तय करने को कहा था। इसमें तांगा, बैलगाड़ी, हाथगाड़ी जैसे गैरयांत्रिक वाहनों को भी शामिल किया गया है।

सरकार को भेजा गया विस्तृत प्रस्ताव

परिवहन मुख्यालय ने इस संबंध में विस्तृत नियमावली तैयार कर सरकार को भेज दी है। अपर परिवहन आयुक्त सनत कुमार सिंह द्वारा तैयार इस प्रस्ताव का फिलहाल अध्ययन किया जा रहा है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार अध्ययन के बाद इसे मंजूरी के लिए कैबिनेट में रखा जाएगा।

पैदल यात्रियों के लिए तीन प्राथमिकताएं तय

प्रस्ताव में पैदल यात्रियों की सुरक्षा को लेकर तीन प्रमुख प्राथमिकताएं निर्धारित की गई हैं—

चिन्हित क्रॉसिंग पर पैदल यात्री को सड़क पार करने में प्राथमिकता दी जाएगी।

गैरयांत्रिक वाहन भी सड़क पार करते समय पैदल यात्रियों को पहले जाने देंगे।

प्रत्येक मोटर वाहन चालक को क्रॉसिंग पर स्टॉप लाइन से पहले रुकना अनिवार्य होगा।

फुटपाथ और अंडरपास की व्यवस्था

सरकार प्रमुख मार्गों पर फुटपाथ विकसित करेगी और ट्रैफिक नियमों को लेकर जागरूकता बढ़ाने के लिए विभिन्न स्थानों पर होर्डिंग लगाए जाएंगे।

इसके अलावा नेशनल हाईवे और एक्सप्रेस-वे पर आबादी के घनत्व के अनुसार एक से तीन किलोमीटर के अंतराल पर अंडरपास और फुटओवर ब्रिज बनाए जाएंगे, ताकि सड़क पार करने के दौरान दुर्घटनाओं को रोका जा सके।

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