नैनीताल। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और ईंधन बचत की अपील के बीच उत्तराखंड में शुक्रवार को एक सकारात्मक पहल देखने को मिली। उत्तराखंड हाईकोर्ट में ‘नो व्हीकल डे’ का आयोजन किया गया, जिसके तहत मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति मनोज कुमार गुप्ता समेत सभी न्यायाधीश पैदल कोर्ट पहुंचे।

जजों ने दिया संदेश

मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति मनोज कुमार गुप्ता ने कहा कि वर्तमान राष्ट्रीय परिस्थितियों को देखते हुए हाईकोर्ट भी अपना सहयोग दे रहा है। हाईकोर्ट के स्टाफ से अपील की गई कि वे शुक्रवार को निजी वाहनों का उपयोग न करें और जहां संभव हो, पैदल या साइकिल से कोर्ट आएं।

दूर-दराज से आने वाले अधिवक्ताओं को वर्चुअल माध्यम से सुनवाई में शामिल होने की सलाह दी गई। वहीं न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल ने कहा कि रोजाना पैदल चलना स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है और अधिक दूरी होने पर साइकिल का उपयोग किया जाना चाहिए।

कुमाऊं कमिश्नर की अपील

दीपक रावत ने भी अधिकारियों से तेल बचाने की मुहिम में शामिल होने की अपील की। उन्होंने निर्देश दिए कि स्थानीय स्तर पर योजनाओं का निरीक्षण पैदल किया जाए।

भीमताल विकास भवन में स्थित विभिन्न विभागों के अधिकारियों से रोस्टर के आधार पर कार शेयरिंग अपनाने को कहा गया है। कमिश्नर स्वयं भी शहरी क्षेत्रों में परियोजनाओं का पैदल निरीक्षण करेंगे।

स्वास्थ्य संस्थानों की स्थिति

बेस अस्पताल:

मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. खड़क सिंह दताल निजी वाहन से अस्पताल पहुंचे। हालांकि अस्पताल में इमरजेंसी सेवाएं होने के कारण डॉक्टरों के लिए सार्वजनिक परिवहन का उपयोग हर समय संभव नहीं है। कई कर्मचारी शेयरिंग बाइक और वाहनों से अस्पताल पहुंचे।

महिला अस्पताल:

मुख्य चिकित्सा अधीक्षक उषा जगंपांगी सरकारी वाहन से अस्पताल पहुंचीं। 25-30 कर्मचारी स्कूटी से, पांच सार्वजनिक परिवहन से और आठ निजी वाहनों से पहुंचे। कई कर्मचारियों ने वाहन साझा कर कार्यालय पहुंचना बेहतर विकल्प माना।

शिक्षा संस्थानों में भी पहल

महिला डिग्री कॉलेज:

प्राचार्य प्रो. आभा शर्मा इन दिनों करीब डेढ़ किलोमीटर पैदल चलकर कॉलेज पहुंच रही हैं। उन्होंने बताया कि वे शिक्षकों और छात्राओं को भी पैदल चलने या सार्वजनिक परिवहन अपनाने के लिए प्रेरित कर रही हैं। अधिकांश प्राध्यापक और कर्मचारी शेयरिंग बाइक से कॉलेज पहुंचे।

अन्य विभागों की स्थिति

संयुक्त निदेशक कृषि, कुमाऊं मंडल:

संयुक्त निदेशक पी.के. सिंह सरकारी वाहन से कमिश्नर कैंप कार्यालय में बैठक के लिए गए थे। उनके कार्यालय के 12 कर्मचारी निजी वाहनों से पहुंचे। अलग-अलग स्थानों से आने के कारण कार शेयरिंग सीमित रही।

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