देहरादून । जनता की समस्याओं को सीधे सुनकर उनका त्वरित समाधान सुनिश्चित करने के उद्देश्य से आयोजित समाधान दिवस सोमवार को आम लोगों की उम्मीदों का मंच बन गया। जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने एक-एक कर 194 शिकायतें सुनीं और संबंधित विभागों को समयबद्ध कार्रवाई के सख्त निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जन शिकायतों के निस्तारण में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और अधिकारियों को संवेदनशीलता तथा जवाबदेही के साथ कार्य करना होगा।

 

समाधान दिवस में भूमि विवाद, अतिक्रमण, सीमांकन, ऋण संबंधी समस्याएं, विधिक सहायता, आर्थिक सहायता और पेयजल संकट जैसे मुद्दे प्रमुख रूप से सामने आए। जिलाधिकारी ने सभी मामलों को गंभीरता से लेते हुए अधिकारियों को प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए।

 

बैंक की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

 

समाधान दिवस के दौरान एक ऐसा मामला सामने आया जिसने बैंकों की ऋण स्वीकृति प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए। मकान ऋण की किश्तें जमा न कर पाने के कारण एक व्यक्ति को बैंक द्वारा नीलामी नोटिस जारी किया गया था। शिकायत सुनने के बाद जिलाधिकारी ने कड़ी नाराजगी जताते हुए एडीएम और लीड बैंक अधिकारी से जांच रिपोर्ट तलब कर ली।

 

उन्होंने सवाल किया कि यदि आवेदक ऋण चुकाने की स्थिति में नहीं था तो बैंक ने किस आधार पर उसे ऋण स्वीकृत किया। डीएम ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।

 

बुजुर्ग पिता से धोखे से कराई रजिस्ट्री, खर्चा देने से मुकरा बेटा

 

समाधान दिवस में एक भावुक मामला भी सामने आया। श्यामपुर निवासी रमाशंकर सिंह ने जिलाधिकारी को बताया कि उनके पुत्र ने हर माह 10 से 15 हजार रुपये खर्च देने का आश्वासन देकर मकान की रजिस्ट्री अपनी पत्नी के नाम करवा ली, लेकिन अब वह भरण-पोषण देने से इनकार कर रहा है। वृद्धावस्था में आर्थिक संकट झेल रहे पिता की शिकायत पर जिलाधिकारी ने तत्काल संज्ञान लेते हुए एसडीएम को भरण-पोषण अधिनियम के तहत कार्रवाई करने के निर्देश दिए।

 

85 वर्षीय बुजुर्ग की शिकायत पर सख्त हुए डीएम

 

मातावाला बाग निवासी 85 वर्षीय सोमप्रकाश ने अपने मकान और नगर निगम की भूमि पर अवैध कब्जे तथा धन उगाही की शिकायत दर्ज कराई। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी ने मुख्य नगर आयुक्त को विस्तृत जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।

 

गंभीर बीमारियों से जूझ रहे बच्चों की होगी पहचान

 

बाल स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए जिलाधिकारी ने स्वास्थ्य विभाग को राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत मधुमेह, हृदय रोग, किडनी रोग, कैंसर और अस्थमा जैसी गंभीर बीमारियों से पीड़ित बच्चों की पहचान कर उनकी सूची तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने ऐसे बच्चों के लिए विशेष चिकित्सा शिविर आयोजित कर समुचित उपचार सुनिश्चित करने को कहा।

 

साथ ही दुर्गम और सड़क संपर्क से वंचित गांवों में गर्भवती महिलाओं को समय पर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने तथा प्रसव से पहले अस्पताल पहुंचाने के लिए माइक्रो स्तर की कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश भी दिए।

 

मानसून से पहले सड़कों, पुलों और नदियों पर फोकस

 

बरसात के मौसम को देखते हुए जिलाधिकारी ने लोक निर्माण विभाग और सिंचाई विभाग को विशेष निर्देश जारी किए। उन्होंने शहर के आंतरिक मार्गों को सुरक्षित बनाने के लिए ब्लैकटॉपिंग कार्य में तेजी लाने, जिले के 11 प्रमुख पुलों की मरम्मत एवं सुरक्षा कार्य शीघ्र पूरा करने तथा नदियों के चैनलाइजेशन का काम समय पर पूरा करने को कहा।

 

नगर निगम को भी अवैध डंपिंग जोनों की सूची फोटोग्राफ सहित प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए।

 

महिलाओं की सुरक्षा को लेकर विशेष निर्देश

 

महिलाओं की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए जिलाधिकारी ने जिले के प्रमुख शहरों और कस्बों में मौजूद डार्क स्पॉट चिन्हित कर वहां पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ऐसा माहौल बनाया जाए जिससे महिलाएं और बालिकाएं खुद को सुरक्षित महसूस कर सकें।

 

लंबित मामलों पर भी दिखाई सख्ती

 

डीएम ने विभागों को निष्प्रयोज्य सामग्री की शीघ्र नीलामी, कार्यालयों में स्वच्छता व्यवस्था बनाए रखने, नियमित निरीक्षण करने तथा लंबित पेंशन और एसीपी प्रकरणों का जल्द निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने साफ कहा कि इन मामलों में किसी भी प्रकार की शिकायत नहीं मिलनी चाहिए।

 

समाधान दिवस में अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) केके मिश्रा, एसडीएम स्मृता परमार, एसडीएम कुमकुम जोशी, परियोजना निदेशक विक्रम सिंह, जिला विकास अधिकारी सुनील कुमार सहित सभी जिला स्तरीय अधिकारी उपस्थित रहे।

 

डीएम डॉ. आशीष चौहान का स्पष्ट संदेश था कि जनता की समस्याओं के समाधान में देरी अब किसी भी स्तर पर स्वीकार नहीं की जाएगी और हर विभाग को परिणाम आधारित कार्य संस्कृति अपनानी होगी।

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