देहरादून। उत्तराखंड का चर्चित जेनी प्रकरण एक बार फिर सुर्खियों में है। करीब दो दशक पुराने मामले में देहरादून पहुंची महिला ने दोबारा सीबीआई जांच और डीएनए टेस्ट कराने की मांग उठाई है। शनिवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान महिला ने पूर्व मंत्री हरक सिंह रावत पर गंभीर आरोप लगाए और अपने साथ हुए कथित घटनाक्रम का जिक्र किया। इस घटनाक्रम के बाद हरक सिंह रावत की ओर से भी प्रेस कॉन्फ्रेंस किए जाने की बात सामने आई है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में महिला ने बताया कि वह अक्टूबर 2002 में देहरादून आई थी। उस समय उसकी उम्र 16 साल थी। उसने दावा किया कि वह यमुना कॉलोनी में करीब दो महीने तक रही थी। महिला का आरोप है कि तत्कालीन मंत्री हरक सिंह रावत ने उसके साथ दुष्कर्म किया। उसने कहा कि उस समय हरक सिंह रावत सत्ता में थे और उनके प्रभाव के कारण उसे कहीं से मदद नहीं मिल पाई।
महिला का आरोप- बेटे का डीएनए टेस्ट ही नहीं हुआ
महिला ने आरोप लगाया कि गर्भवती होने के दौरान उसे मानसिक अस्पताल में रखा गया था। उसने दावा किया कि वहां उसके साथ गलत व्यवहार हुआ और धमकाकर कुछ दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कराए गए। महिला के मुताबिक, सीबीआई की टीम उससे मानसिक अस्पताल में केवल एक बार मिलने आई थी।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में महिला ने कहा कि उसे हिंदी नहीं आती थी और उस समय उसके साथ जो कुछ हुआ, उसे वह आज तक नहीं भुला पाई है। उसने पुराने मामले की दोबारा सीबीआई जांच कराने की मांग करते हुए सवाल उठाया कि जब उसके बेटे का डीएनए टेस्ट ही नहीं हुआ तो जांच किस आधार पर हुई? महिला ने कहा कि उसके बेटे को अपने पिता का नाम चाहिए।
मुख्यमंत्री का नाम आने के बाद देहरादून आने का फैसला
महिला ने बताया कि जब मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सार्वजनिक रूप से उसका नाम लिया, तब उसने देहरादून आने का फैसला किया। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान वह कई बार भावुक हुई और अपने साथ हुए कथित घटनाक्रम को लेकर अपनी बात रखी।
पुराने मामले को लेकर महिला के नए आरोपों और दोबारा जांच की मांग के बाद प्रदेश की राजनीति में भी हलचल बढ़ गई है। अब सभी की निगाहें हरक सिंह रावत की प्रस्तावित प्रेस कॉन्फ्रेंस पर टिकी हैं, जिसमें वह इन आरोपों पर अपना पक्ष रखेंगे।
