देहरादून। मुख्यमंत्री हेल्पलाइन-1905 पर लंबित शिकायतों की बढ़ती संख्या को लेकर जिला प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने विभिन्न विभागों में लंबित मामलों की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। समीक्षा बैठक में स्वास्थ्य विभाग का कोई प्रतिनिधि उपस्थित नहीं होने पर मुख्य चिकित्साधिकारी (सीएमओ) को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।

 

समीक्षा में सामने आया कि विभिन्न विभागों में 2100 से अधिक शिकायतें लंबित हैं। इनमें बड़ी संख्या ऐसी शिकायतों की है, जिनका निर्धारित समय सीमा के भीतर समाधान नहीं हो पाया है। जिलाधिकारी ने इसे गंभीर प्रशासनिक लापरवाही मानते हुए संबंधित अधिकारियों को जवाबदेही तय करने की चेतावनी दी।

 

स्वास्थ्य विभाग का प्रदर्शन सबसे खराब

 

36 दिनों से अधिक समय से लंबित मामलों की समीक्षा में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग सबसे खराब प्रदर्शन करने वाला विभाग पाया गया। विभाग की 345 शिकायतें निर्धारित समय सीमा पार कर चुकी हैं। इसके अलावा शहरी विकास विभाग की 237, राजस्व विभाग की 225, पुलिस विभाग की 133 तथा तकनीकी शिक्षा विभाग की 111 शिकायतें भी लंबे समय से लंबित हैं।

 

वहीं मुख्यमंत्री हेल्पलाइन के लेवल-1 (L-1) पर सबसे अधिक 384 शिकायतें शहरी विकास विभाग में लंबित मिलीं। इसके बाद पुलिस विभाग में 309, लोक निर्माण विभाग में 299, ऊर्जा विभाग में 234, जल संस्थान में 183 तथा राजस्व विभाग में 174 शिकायतें लंबित दर्ज की गईं।

 

गुणवत्तापूर्ण निस्तारण पर जोर

 

जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा दिए गए “सरलीकरण, समाधान, निस्तारण एवं संतुष्टि” के सिद्धांत के अनुरूप शिकायतों का समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण समाधान सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने प्रत्येक विभाग में टास्क ऑफिसर नामित करने, शिकायतों की दैनिक निगरानी करने तथा शिकायतकर्ताओं से सीधे संवाद स्थापित करने के निर्देश भी दिए।

 

डीएम ने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर दर्ज शिकायतों का प्रभावी निस्तारण शासन की प्राथमिकता है और इसमें लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

 

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