उत्तराखंड पुलिस के पति-पत्नी सर्किल ऑफिसर की मुसीबतें बढ़ गई हैं। नैनीताल हाईकोर्ट ने ऊधम सिंह नगर में तैनात सीओ नीरज सेमवाल की पत्नी और चम्पावत में तैनात सीओ निहारिका सेमवाल के जाति प्रमाणपत्र को लेकर कड़ा रुख अपनाया है।
ST सर्टिफिकेट पर उठा सवाल
हाईकोर्ट में क्यू वारंटो याचिका दायर कर उत्तराखंड पुलिस में कार्यरत महिला आरक्षी सरोजबाला रावत ने आरोप लगाया कि निहारिका सेमवाल ब्राह्मण हैं। इसके बावजूद उन्होंने जौनसार क्षेत्र से अनुसूचित जनजाति का प्रमाणपत्र हासिल कर इसी के आधार पर पुलिस सेवा में नौकरी पाई है।उसने चुनौती दी है कि इसी अवैध प्रमाणपत्र के आधार पर निहारिका को पुलिस में नौकरी मिली है। इस मामले की सुनवाई सीजे मनोज कुमार गुप्ता और जस्टिस सुभाष उपाध्याय की अदालत में हो रही है। हाईकोर्ट ने इस मामले में निहारिका सेमवाल से जनजातीय प्रमाणपत्र तलब किया है। यह उत्तराखंड का इस तरह का पहला मामला है जिसकी हाईकोर्ट में सुनवाई चल रही है।
याचिकाकर्ता सरोजबाला ने कोर्ट में कहा कि चूंकि निहारिका ST वर्ग से नहीं हैं, इसलिए उनके खिलाफ दर्ज एससी-एसटी एक्ट का मुकदमा रद्द किया जाए और फर्जी प्रमाणपत्र के आधार पर मिली नौकरी भी रद्द की जाए।
उल्लेखनीय है कि इसी मामले में सीओ निहारिका ने सरोजबाला के खिलाफ देहरादून में एससी-एसटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कराया था, जिसमें सरोजबाला को जेल भी जाना पड़ा था।

सीओ नीरज सेमवाल को भी नोटिस
इधर आय से अधिक संपत्ति के मामले में सीओ नीरज सेमवाल को भी झटका लगा है। गढ़वाल क्षेत्र भ्रष्टाचार रोधी विशेष न्यायाधीश अंजलि बेंजवाल ने शिकायत के आधार पर नीरज सेमवाल को नोटिस जारी किया है। उन्हें भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 2018 की धारा 13(1)(B) और 13(2) के तहत 9 सितंबर को अदालत में साक्ष्य पेश करने के निर्देश दिए गए हैं।

सुप्रीम कोर्ट का हवाला
याचिका में सुप्रीम कोर्ट के 28 नवंबर 2000 के आदेश का भी हवाला दिया गया है। जिसमें कहा गया है कि इस तिथि के बाद जारी सभी ST प्रमाणपत्र अवैध हैं और उनके आधार पर ली गई नौकरी व अन्य लाभ भी शून्य माने जाएंगे।
फिलहाल हाईकोर्ट के आदेश के बाद इस मामले पर पूरे पुलिस महकमे की नजरें टिकी हैं।
