ऊखीमठ/रुद्रप्रयाग। केदारनाथ धाम की शीतकालीन धार्मिक परंपराओं से छेड़छाड़ के आरोपों को लेकर उप जिलाधिकारी ऊखीमठ अनिल कुमार शुक्ला ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने अधिशासी अभियंता, निर्माण खंड लोक निर्माण विभाग गुप्तकाशी को मामले में आवश्यक और प्रभावी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
दरअसल, केदारनाथ धाम में इन दिनों प्रधानमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट के तहत निर्माण कार्य चल रहा है, जहां लगभग 50 से अधिक मजदूर कार्यरत हैं। इसी दौरान कुछ दिन पूर्व बर्फबारी के दौरान केदारनाथ धाम का एक वीडियो इंटरनेट मीडिया पर वायरल हुआ, जिसके बाद तीर्थपुरोहितों और श्रद्धालुओं में रोष फैल गया।
उप जिलाधिकारी द्वारा जारी निर्देश में बताया गया है कि केदारनाथ धाम के तीर्थ पुरोहित संतोष त्रिवेदी ने छह जनवरी को एक शिकायती पत्र प्रस्तुत किया था। शिकायत में कहा गया कि वर्तमान में शीतकाल के चलते केदारनाथ धाम के कपाट बंद हैं, इसके बावजूद वुड स्टोन कंपनी के ठेकेदार सोभन सिंह द्वारा पांच जनवरी को मंदिर परिसर और मंदिर के समक्ष स्थित ‘ॐ’ स्थल का वीडियो बनाकर उसे सोशल मीडिया पर प्रसारित किया गया।
तीर्थपुरोहितों का कहना है कि केदारनाथ धाम में शीतकाल के दौरान छह माह देव पूजा और छह माह नर पूजा की परंपरा का विशेष धार्मिक महत्व है। शीतकाल में देव पूजा को अत्यंत पवित्र माना जाता है। ऐसे समय में मंदिर परिसर में मानव गतिविधियों का होना और इन गतिविधियों का इंटरनेट मीडिया पर प्रसार करना परंपराओं के विरुद्ध है, जिससे देश-विदेश में आस्था रखने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंची है।
मामले को गंभीरता से लेते हुए उप जिलाधिकारी ऊखीमठ ने अधिशासी अभियंता को निर्देश दिए हैं कि वुड स्टोन कंपनी के ठेकेदार द्वारा की जा रही ऐसी गतिविधियों को तत्काल प्रभाव से रोका जाए। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि शीतकालीन अवधि में केदारनाथ धाम क्षेत्र में किसी भी अन्य कंपनी या श्रमिक द्वारा इस प्रकार की गतिविधियां न हों।
