उत्तराखंड:उत्तराखंड में यातायात नियमों का उल्लंघन अब पहले से ज्यादा महंगा पड़ सकता है। राज्य सरकार मोटर यान अधिनियम, 1988 के तहत जुर्माने की दरों में संशोधन की तैयारी कर रही है। परिवहन विभाग ने 38 श्रेणियों में चालान राशि बढ़ाने का प्रस्ताव शासन को भेज दिया है।
अपर परिवहन आयुक्त सनत कुमार सिंह ने प्रशमन दरों में संशोधन का विस्तृत प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजा है। विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार यह प्रस्ताव फिलहाल वित्त विभाग के परीक्षण में है और स्वीकृति के बाद कैबिनेट की बैठक में रखा जाएगा।
हाल ही में सड़क सुरक्षा परिषद की बैठक में मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने बढ़ते सड़क हादसों पर चिंता जताते हुए सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए थे। इसी क्रम में चालान दरों में संशोधन का प्रस्ताव तैयार किया गया।
प्रस्ताव के अनुसार बिना टिकट यात्रा का जुर्माना 500 से बढ़ाकर 1,000 रुपये, बिना लाइसेंस ड्राइविंग 2,500 से 5,000 रुपये, निरस्त लाइसेंस पर ड्राइविंग 5,000 से 10,000 रुपये, वाहन में मॉडिफिकेशन 5,000 से 10,000 रुपये, तेज रफ्तार 2,000 से 4,000 रुपये और सीट बेल्ट नहीं लगाने पर 1,000 से बढ़ाकर 2,000 रुपये किया जा सकता है।
वाहन चलाते समय मोबाइल फोन के उपयोग पर पहली बार 2,000 और दूसरी बार 5,000 रुपये जुर्माना प्रस्तावित है। वर्तमान में यह क्रमशः 1,000 और 5,000 रुपये है।
सार्वजनिक स्थान पर शोर और वायु प्रदूषण मानकों के उल्लंघन पर पहली बार 5,000 और दूसरी बार 10,000 रुपये जुर्माने की सिफारिश की गई है। अभी यह 2,500 और 5,000 रुपये है।
बिना अनुमति सार्वजनिक स्थान पर रेस या स्टंट करने पर पहली बार 10,000 और दूसरी बार 20,000 रुपये जुर्माने का प्रस्ताव है।
हेलमेट नहीं पहनने पर 1,500 रुपये जुर्माना और तीन महीने तक ड्राइविंग लाइसेंस निलंबित करने की सिफारिश की गई है। वर्तमान में यह जुर्माना 1,000 रुपये है।
आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2024-25 में 3,92,303 चालान किए गए थे, जो 2025-26 में बढ़कर 8,38,391 हो गए। चालान से वसूला गया राजस्व 45 करोड़ रुपये से बढ़कर 62 करोड़ रुपये पहुंच गया है।
सरकार का मानना है कि सड़क हादसों में कमी लाने और यातायात नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के लिए जुर्माने की दरों में वृद्धि आवश्यक है। अंतिम निर्णय कैबिनेट की मंजूरी के बाद लिया जाएगा।
