देहरादून | प्रदेश में प्रस्तावित रोपवे परियोजनाओं को गति देने के लिए मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने मंगलवार को उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। बैठक में विभिन्न रोपवे प्रोजेक्ट्स की अद्यतन स्थिति की जानकारी ली गई और निर्माण कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए गए।
मुख्य सचिव ने रोपवे परियोजनाओं के लिए नियामक प्राधिकरण के रूप में ब्रिडकुल को और अधिक सशक्त बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने इसके रोल और जिम्मेदारियों का विस्तृत ड्राफ्ट शीघ्र तैयार करने को कहा।
जागेश्वर धाम योजना में रोपवे शामिल
मुख्य सचिव ने जागेश्वर धाम विकास योजना में रोपवे परियोजना को शामिल किए जाने के भी निर्देश दिए, ताकि तीर्थयात्रियों और पर्यटकों को बेहतर सुविधा मिल सके।
प्राथमिकता तय करने को उपसमिति गठित
रोपवे परियोजनाओं की प्राथमिकता तय करने के लिए प्रमुख सचिव नियोजन की अध्यक्षता में उपसमिति गठित की गई है। इसमें सचिव पर्यटन, सचिव आवास, सचिव लोक निर्माण विभाग और नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण को शामिल किया गया है। यह उपसमिति प्रदेश में प्रस्तावित रोपवे परियोजनाओं की प्राथमिकता निर्धारित करेगी।
मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि किसी भी शहर में रोपवे निर्माण के लिए स्थानीय आवश्यकता, पर्यटन संभावनाओं और यातायात दबाव को ध्यान में रखते हुए स्थानों का चयन पर्यटन विभाग और स्थानीय प्रशासन द्वारा किया जाएगा।
मसूरी और केदारनाथ परियोजनाओं पर फोकस
मुख्य सचिव ने मसूरी रोपवे के लोअर टर्मिनल के पास सार्वजनिक सड़क मार्ग से जुड़े मामले का तीन दिन के भीतर निस्तारण करने के निर्देश दिए।
वहीं केदारनाथ रोपवे परियोजना के लिए लॉजिस्टिक्स ड्राई रन करते हुए असुरक्षित स्थलों का चिन्हीकरण और सुधार कार्य तत्काल शुरू करने को कहा गया। साथ ही कुंड ब्रिज और नई बाईपास सड़क को शीघ्र पूरा करने के निर्देश दिए गए। जहां नए पुल और बाईपास की आवश्यकता है, वहां समयबद्ध सर्वे और निर्माण कार्य समानांतर रूप से करने को कहा गया।
शासन का कहना है कि रोपवे परियोजनाएं प्रदेश में पर्यटन, तीर्थाटन और यातायात प्रबंधन के लिए महत्वपूर्ण साबित होंगी।
