देहरादून: योग गुरु बाबा रामदेव की कंपनी पतंजलि आयुर्वेद एक बार फिर विवादों में है। पिथौरागढ़ में पतंजलि के गाय के घी के सैंपल दो लैब टेस्ट में फेल पाए गए हैं। इसके बाद कोर्ट ने घी के निर्माता, वितरक और खुदरा विक्रेता पर कुल ₹1.40 लाख का जुर्माना लगाया है। हालांकि, पतंजलि ने इस आदेश को “त्रुटिपूर्ण और विधि-विरुद्ध” बताते हुए इससे असहमति जताई है।
कैसे शुरू हुआ मामला?
पिथौरागढ़ के सहायक खाद्य सुरक्षा आयुक्त आर.के. शर्मा के अनुसार अक्टूबर 2020 में पतंजलि गाय के घी के सैंपल लिए गए थे।पहले सैंपल को रुद्रपुर स्थित राज्य खाद्य प्रयोगशाला में भेजा गया, जहां घी मानकों पर खरा नहीं उतरा।इसके बाद व्यापारियों ने सितंबर 2021 में सैंपल को केंद्र सरकार की लैब से जांच कराने का अनुरोध किया था और साल 2022 में केंद्र लैब ने भी सैंपल को फेल घोषित कर दिया था।
फिर 17 फरवरी 2022 को एसडीएम कोर्ट में मामला दर्ज हुआ था। लगभग तीन साल की प्रक्रिया के बाद, 19 नवंबर 2025 को एडीएम कोर्ट ने फैसला सुनाया और सभी संबंधित पक्षों पर जुर्माना लगाया।
क्या कहता है पतंजलि?
पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड ने अपने आधिकारिक ‘X’ अकाउंट पर विस्तृत स्पष्टीकरण जारी किया है। कंपनी ने कहा कि रेफरल लैब NABL से मान्यता प्राप्त नहीं थी, इसलिए टेस्ट परिणाम कानूनी रूप से मान्य नहीं हैं। परीक्षण जिन पैरामीटर पर किया गया, वे उस समय FSSAI के मानकों में लागू ही नहीं थे।
और दोबारा परीक्षण सैंपल की एक्सपायरी डेट खत्म होने के बाद किया गया, जो कानून के अनुसार अमान्य है।
कंपनी का कहना है कि कोर्ट ने इन महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विचार किए बिना आदेश पारित किया, इसलिए वे फूड सेफ्टी ट्रिब्यूनल में अपील दायर कर रहे हैं।
पतंजलि का दावा – घी हानिकारक नहीं, केवल RM Value का मामूली अंतर
पतंजलि ने यह भी कहा कि फैसले में कहीं भी यह नहीं लिखा गया कि घी सेहत के लिए हानिकारक है।घी में केवल RM Value में “नाम-मात्र” का अंतर पाया गया।RM Value (volatile fatty acid level) मौसम, पशुओं के आहार और क्षेत्रीय परिस्थितियों के आधार पर बदल सकता है।
FSSAI भी समय-समय पर RM Value के मानक बदलता रहता है।
पतंजलि का दावा है कि वे राष्ट्रीय स्तर के कड़े मानकों के आधार पर ही घी का उत्पादन और बिक्री करते हैं।
