हरिद्वार : हरिद्वार कुंभ क्षेत्र और आसपास के गंगा घाटों में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने की मांग लगातार तेज होती जा रही है। इस मांग ने न सिर्फ धार्मिक बल्कि राजनीतिक गलियारों में भी नई बहस छेड़ दी है। अलग-अलग राजनीतिक दलों और धार्मिक संगठनों की ओर से इस पर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

एसटी हसन बोले- पहले संविधान बदलिए

समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद एसटी हसन ने इस मांग पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि यदि ऐसा कोई फैसला लेना है तो सबसे पहले संविधान में बदलाव करना होगा।

एसटी हसन ने कहा, “यह देश सबके लिए है, किसी एक समुदाय के लिए नहीं। यह किसी की निजी संपत्ति नहीं है। संविधान के अनुसार कोई भी भारतीय देश में कहीं भी आने-जाने के लिए स्वतंत्र है। इस तरह की चर्चाओं को रोका जाना चाहिए, क्योंकि ये समाज में नफरत फैलाती हैं। अगर कोई अपराध करता है, तो उसके खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई होनी चाहिए।”

श्री गंगा सभा ने रखा पक्ष

इससे पहले गुरुवार को श्री गंगा सभा के अध्यक्ष नितिन गौतम ने गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर बैन की मांग को जायज ठहराया था। उन्होंने कहा कि यह मांग किसी एक संस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि सनातन परंपरा, मां गंगा की धार्मिक अस्मिता और हर की पौड़ी की पवित्र व्यवस्था से जुड़ा विषय है।

उन्होंने कहा कि कुंभ क्षेत्र, हर की पौड़ी और आसपास के घाटों में किसी भी गैर-हिंदू व्यक्ति का प्रवेश नहीं होना चाहिए, चाहे वह सरकारी कर्मचारी हो, किसी संस्था से जुड़ा हो या मीडिया कर्मी ही क्यों न हो।

मुख्यमंत्री ने कही गंभीरता से विचार करने की बात

इस मांग के सामने आने के बाद उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने कहा था कि सरकार इस विषय पर गंभीरता से विचार कर रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा, “हरिद्वार एक पूज्य स्थल है और ऋषि-मुनियों की भूमि रही है। हम चाहते हैं कि वहां की पवित्रता बनी रहे। गंगा की पौराणिक और धार्मिक मान्यताएं स्थापित रहें और उस स्थल का नाम व महत्व प्रभावित न हो। इसके लिए सभी पहलुओं का अध्ययन किया जा रहा है।”

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