नैनीताल : देहरादून निवासी वीरेंद्र कुमार व अन्य ने द्वारा एक जनहित याचिका हाईकोर्ट में दायर की गयी थी जो कि
” राज्य सरकार द्वारा देहरादून के डोईवाला क्षेत्र में बहने वाली सुशुवा व अन्य नदियों में खनन कार्य करने के हेतु भारी भरकम मशीनों की अनुमती देने के खिलाफ थी ।
उनका कहना है कि भारी मशीनों के कारण खनन करने पर नदी का जलस्तर निचे बैठ गया है,जिससे उनकी कृषि योग्य भूमि भी प्रभावित हो गयी है।
वीरेंद्र व अन्य किसानों के अनुसार उनको सिंचाई के लिए पानी तक नहीं मिल रहा है, यही नहीं भारी मशीनों द्वारा खनन कार्य करने के कारण स्थानीय लोग बेरोजगार हो गए हैं।
जनहित याचिका में उन्होंने कोर्ट से अपील की है कि भारी मशीनों से खनन कार्य करने पर रोक लगाई जाय, उनकी कृषि योग्य भूमि को बचाया जाय और खनन कार्य मे स्थानीय लोगों को प्राथमिकता दी जाय, न कि मशीनों को।
मामले की सुनवाई पर राज्य सरकार की तरफ से कहा गया कि बरसात के दौरान नदी में भारी मात्रा में शिल्ट, गाद, बड़े बोल्डर व अन्य आ जाते हैं, इस कारण नदी का रास्ता अवरुद्ध होकर पानी इधर उधर बहता है, इस मलबे को हटाने के लिए मैन पावर की जगह मशीनों की जरूरत पड़ती है। इसलिए सरकार ने जनहित को देखते हुए मशीनों का उपयोग करने की अनुमति दी है, ताकि नदी स्वच्छंद बहती रहे ।
परन्तु इस जबाब से याचिकाकर्ता संतुष्ट नहीं हुए व उनका कहना था कि सरकार के इस फैसले का मुख्य कारण नदियों पर हुआ अवैध खनन है,ना कि नदी के बहाव को लेकर सरकार चिंतित है ।
मामले को गम्भीरता से लेते हुए अगली सुनवाई 3 अप्रैल को रखी गयी है , मुख्य न्यायधीश जी नरेंद्र और न्यायमूर्ती आलोक मेहरा की खंडपीठ ने सम्बंधित अधिकारियों से इस सम्बंध में सरकार का प्लान प्रस्तुत करने को कहा है।
उन्होंने जबाब तलब किया गई कि क्या “वह रिवर ड्रेजिंग पॉलिसी की निर्धारित शर्तो के मुताबिक हो रहा है ?
क्या वर्तमान समय मे राज्य सरकार समय समय पर इसकी मोनिटरिंग करती रहती है? आज हुई सुनवाई में सचिव खनन सहित अन्य अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उपस्थित हुए।