देहरादून: अंकिता भंडारी हत्याकांड में कथित वीआईपी को राज्यपाल बनाए जाने के विरोध में प्रदर्शन करना कांग्रेस नेताओं को भारी पड़ गया है। देहरादून में लोकभवन के गेट के सामने बिना अनुमति प्रदर्शन करने के मामले में पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल, विधायक और पार्टी के अन्य नेताओं समेत 30 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। एफआईआर में 10 से 15 अज्ञात लोगों को भी आरोपी बनाया गया है। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 132 और 223 के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पुलिस के अनुसार, अंकिता भंडारी हत्याकांड प्रकरण में कथित वीआईपी को राज्यपाल बनाए जाने के विरोध में कांग्रेस की ओर से घंटाघर से जिला प्रशासन तक कैंडल मार्च निकालकर ज्ञापन देने की योजना थी। हालांकि, आरोप है कि कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता बिना अनुमति लोकभवन तक पहुंच गए और गेट के सामने प्रदर्शन करने लगे।
पुलिस के निर्देशों की अनदेखी का आरोप
कैंट थाना प्रभारी संतोष सिंह कुंवर की शिकायत के मुताबिक, प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने नेताओं और कार्यकर्ताओं को कानून-व्यवस्था बनाए रखने और यातायात बाधित नहीं करने के निर्देश दिए। आरोप है कि समझाने के बावजूद प्रदर्शनकारी नहीं माने और बैरियर पार कर जबरन आगे बढ़ने का प्रयास किया।
पुलिस की एफआईआर में कहा गया है कि प्रदर्शन के कारण सरकारी कार्य में बाधा और यातायात व्यवस्था प्रभावित होने की स्थिति बनी। हालात को नियंत्रित करने के लिए मौके पर अतिरिक्त पुलिस बल बुलाया गया। इसके बाद प्रदर्शनकारियों को वहां से हटाया गया।
हरीश रावत और गणेश गोदियाल समेत कई नेता नामजद
एसपी सिटी शेखर सुयाल के अनुसार, कैंट थाना प्रभारी की शिकायत के आधार पर पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल, प्रीतम सिंह, हरक सिंह रावत, ज्योति रौतेला, गरिमा दसौनी और पूर्व विधायक राजकुमार समेत 30 कांग्रेस नेताओं के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। इसके अलावा 10 से 15 अज्ञात कांग्रेस कार्यकर्ताओं को भी एफआईआर में शामिल किया गया है।
मामले की विवेचना पुलिस उपनिरीक्षक कैलाश चंद्र भट्ट को सौंपी गई है। पुलिस का कहना है कि दर्ज मुकदमे के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी और आरोपों की जांच की जा रही है।
