देहरादून: उत्तराखंड सरकार ने वित्तीय वर्ष 2025-26 का आर्थिक सर्वेक्षण गुरुवार को जारी किया। प्रमुख सचिव डॉ. आर. मीनाक्षी सुंदरम ने सचिवालय मीडिया सेंटर सभागार में पत्रकार वार्ता के दौरान राज्य की आर्थिक प्रगति के आंकड़े साझा किए। उन्होंने पिछले चार वर्षों के तुलनात्मक आंकड़े भी प्रस्तुत किए, जिससे राज्य की आर्थिक मजबूती और विकास की स्पष्ट तस्वीर सामने आई।
नियोजन विभाग के अनुसार, 2022 की तुलना में उत्तराखंड की जीएसडीपी में डेढ़ गुना वृद्धि हुई है। 2022 में राज्य की जीएसडीपी का आकार 2.54 लाख करोड़ रुपये था, जो अब बढ़कर 3.81 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया है। प्रति व्यक्ति आय में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। 2022 में प्रति व्यक्ति आय 1,94,000 रुपये थी, जो अब बढ़कर 2,73,000 रुपये हो गई है। इसी अवधि में गरीबी इंडेक्स में भी गिरावट दर्ज की गई है। 9.7 प्रतिशत से घटकर यह 6.92 प्रतिशत हो गया है।
राज्य में एमएसएमई सेक्टर ने भी अच्छा प्रदर्शन किया है। 2022 में लगभग 59,000 उद्योग थे, जो अब 79,000 से अधिक हो गए हैं। इस सेक्टर में रोजगार के अवसरों की संख्या भी बढ़कर लगभग चार लाख पचास हजार हो गई है। बड़े उद्योगों की संख्या 107 से बढ़कर 128 हो गई है। इसके अलावा, स्टार्टअप इकोसिस्टम में भी तेजी आई है। 2017 में राज्य में कोई स्टार्टअप नहीं था, 2022 में 702 स्टार्टअप दर्ज हुए और अब यह संख्या बढ़कर 1,750 तक पहुंच गई है।
इन्फ्रास्ट्रक्चर और ऊर्जा क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण सुधार हुए हैं। पिछले चार वर्षों में 885 किलोमीटर लंबी सड़कों का निर्माण हुआ है, वहीं सोलर पॉवर प्लांट से बिजली उत्पादन में भी रिकॉर्ड वृद्धि दर्ज की गई है। 2022 में सोलर से 439 मेगावाट बिजली पैदा हो रही थी, जो अब 1,027 मेगावाट हो गई है।
कृषि क्षेत्र में भी प्रगति हुई है, खासकर चावल, दूध और मछली के उत्पादन में। राज्य की जीएसडीपी में सबसे बड़ा योगदान मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर का रहा, जो 26.02 प्रतिशत है। डॉ. मीनाक्षी सुंदरम ने बताया कि ये आंकड़े सरकार की नीतियों और चार वर्षों में किए गए विकास प्रयासों का परिणाम हैं। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य की आर्थिक मजबूती, रोजगार सृजन और ऊर्जा उत्पादन में हुई वृद्धि यह दर्शाती है कि उत्तराखंड लगातार आर्थिक विकास की दिशा में अग्रसर है।
