देहरादून। पांच दिवसीय बैंकिंग सप्ताह समेत विभिन्न मांगों को लेकर मंगलवार को उत्तराखंड में अखिल भारतीय बैंक हड़ताल का असर साफ दिखाई दिया। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन (यूएफबीयू) के आह्वान पर हुई इस हड़ताल में सार्वजनिक क्षेत्र, निजी क्षेत्र, क्षेत्रीय ग्रामीण और सहकारी बैंकों के अधिकारी व कर्मचारी शामिल रहे।
सुबह करीब दस बजे विभिन्न बैंकों के अधिकारी और कर्मचारी एस्ले हॉल स्थित सेंट्रल बैंक के पास एकत्र हुए। इसके बाद सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए प्रदर्शनकारियों ने घंटाघर तक रैली निकाली। रैली के दौरान बैंककर्मियों ने अपनी मांगों के समर्थन में जोरदार नारे लगाए।
पांच दिवसीय बैंकिंग सप्ताह की मांग
प्रदर्शन को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि बैंककर्मी लंबे समय से हफ्ते में पांच दिन कार्य और सभी शनिवार को अवकाश की मांग कर रहे हैं, लेकिन सरकार उनकी मांगों को लगातार नजरअंदाज कर रही है।
उन्होंने बताया कि यह मांग भारतीय बैंक संघ (आईबीए) और यूएफबीयू के बीच वर्ष 2023 में हुए समझौता ज्ञापन और 8 मार्च 2024 को हुए सेटलमेंट/जॉइंट नोट में की गई सिफारिशों के अनुरूप है।
बैंककर्मियों का कहना है कि सोमवार से शुक्रवार तक कार्य समय बढ़ाकर सभी शनिवार को अवकाश घोषित करने से ग्राहकों को किसी तरह की असुविधा नहीं होगी।
एक दिन में 8 हजार करोड़ का लेनदेन प्रभावित
यूएफबीयू के राजन पुंडीर ने बताया कि एक दिन की हड़ताल से पूरे प्रदेश में करीब आठ हजार करोड़ रुपये का लेनदेन प्रभावित होने की संभावना है।
प्रदर्शन में इंद्र सिंह रावत, अनिल जैन, हेमंत मल्होत्रा, चंद्रकांत जोशी, कमल तोमर सहित बड़ी संख्या में बैंककर्मी मौजूद रहे।
लगातार चार दिन बंद रहे बैंक
लगातार चार दिन बैंक बंद रहने से आम लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।
24 जनवरी को शनिवार और 25 जनवरी को रविवार होने के कारण बैंक बंद रहे। इसके बाद सोमवार को गणतंत्र दिवस की छुट्टी थी और मंगलवार को हड़ताल के चलते बैंकों में कोई कामकाज नहीं हो सका।
हालांकि बैंककर्मियों ने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन जनता के खिलाफ नहीं है, बल्कि बैंकिंग क्षेत्र में हो रहे भेदभाव और कर्मचारियों की उपेक्षा के विरोध में किया जा रहा है।
