देहरादून, 12 जून। जनपद में गंभीर एवं जन्मजात बीमारियों से पीड़ित आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों के उपचार के लिए जिला प्रशासन ने संवेदनशील पहल शुरू की है। जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने ऐसे बच्चों की पहचान कर उन्हें निःशुल्क उपचार उपलब्ध कराने के लिए विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं।
डीएम ने जिला कार्यक्रम अधिकारी को 6 वर्ष तक के बच्चों तथा मुख्य शिक्षा अधिकारी को 6 से 18 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों और किशोरों के चिन्हीकरण के लिए व्यापक सर्वेक्षण अभियान संचालित करने को कहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आर्थिक तंगी के कारण कोई भी बच्चा उपचार से वंचित नहीं रहना चाहिए।
जिलाधिकारी ने बताया कि चिन्हित बच्चों का उपचार भारत सरकार के राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के तहत निःशुल्क कराया जाएगा। वहीं जिन गंभीर बीमारियों का इलाज इस योजना के अंतर्गत संभव नहीं होगा, उनके लिए अन्य वित्तीय संसाधनों और राइफल फंड का उपयोग किया जाएगा।
बाल विकास विभाग द्वारा अब तक 6 वर्ष तक की आयु के 12 गंभीर रूप से बीमार बच्चों की पहचान की जा चुकी है। इन बच्चों को आवश्यक चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।
डीएम डॉ. आशीष चौहान ने कहा कि बच्चों का स्वास्थ्य और उनका सुरक्षित भविष्य प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने विद्यालयों, आंगनबाड़ी केंद्रों और क्षेत्रीय कर्मचारियों के माध्यम से सर्वेक्षण तेज करने तथा चिन्हित बच्चों को प्राथमिकता के आधार पर उपचार दिलाने के निर्देश दिए हैं।
जिला प्रशासन ने आमजन से भी अपील की है कि यदि उनके संज्ञान में कोई ऐसा बच्चा है जो गंभीर या जन्मजात बीमारी से ग्रसित है और उसका परिवार उपचार कराने में असमर्थ है, तो इसकी सूचना निकटतम आंगनबाड़ी केंद्र, विद्यालय, स्वास्थ्य केंद्र या संबंधित विभाग को दें, ताकि समय पर उपचार और सहायता उपलब्ध कराई जा सके।
जिला प्रशासन ने इसे केवल प्रशासनिक कार्रवाई नहीं बल्कि समाज के सबसे संवेदनशील वर्ग के प्रति मानवीय दायित्व बताते हुए हर जरूरतमंद बच्चे तक उपचार सुविधा पहुंचाने की प्रतिबद्धता दोहराई है।
