उत्तराखंड। उत्तराखंड में जनगणना के पहले चरण के तहत भवनों की स्व-गणना की शुरुआत 10 अप्रैल से होगी। इस अभियान का शुभारंभ राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेनि) करेंगे।
बुधवार को सचिवालय स्थित मीडिया सेंटर में आयोजित प्रेसवार्ता में सचिव जनगणना दीपक कुमार और निदेशक इवा आशीष श्रीवास्तव ने बताया कि जनगणना के प्रथम चरण — मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना — का कार्य 25 अप्रैल से 24 मई तक घर-घर जाकर किया जाएगा।
10 से 24 अप्रैल तक स्व-गणना का मौका
उन्होंने बताया कि 25 अप्रैल से पहले 10 अप्रैल से 24 अप्रैल के बीच नागरिकों को पोर्टल se.census.gov.in पर स्व-गणना (Self Enumeration) करने का अवसर दिया जाएगा। पोर्टल पर 16 क्षेत्रीय भाषाओं में प्रश्नों के उत्तर दिए जा सकेंगे।
स्व-गणना पूरी करने पर नागरिकों को एक यूनिक सेल्फ-एनुमरेशन आईडी (SE ID) मिलेगी, जिसे संबंधित प्रगणक को उपलब्ध कराना होगा। इस बार पूरी जनगणना प्रक्रिया मोबाइल एप्लिकेशन आधारित होगी।
30 हजार से अधिक कर्मियों की तैनाती
पहले चरण में 4,491 सुपरवाइजर और 26,348 प्रगणक मिलाकर कुल 30,839 कर्मियों की टीम कार्य करेगी। संचालन, पर्यवेक्षण और प्रबंधन के लिए जनगणना प्रबंधन एवं निगरानी प्रणाली (CMMS पोर्टल) का उपयोग किया जाएगा।
राज्य में प्रशिक्षण का कार्य भी जारी है। 650 बैच में प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसके लिए दो नेशनल ट्रेनर, 23 मास्टर ट्रेनर और 555 फील्ड ट्रेनर तैनात किए गए हैं।
हिमाच्छादित जिलों में सितंबर में होगी गणना
दूसरे चरण में हिमाच्छादित जिलों — चमोली, रुद्रप्रयाग, पिथौरागढ़ और उत्तरकाशी — के 131 गांवों और तीन नगरीय क्षेत्रों में 11 से 30 सितंबर के बीच जनगणना का कार्य किया जाएगा।
पहाड़ों में बंद मकानों की भी होगी एंट्री
अधिकारियों ने बताया कि पहाड़ी क्षेत्रों में कई मकान बंद या खंडहर स्थिति में हैं। ऐसे भवनों को ‘लॉक हाउस’ के रूप में दर्ज किया जाएगा और उसी अनुसार डाटा में एंट्री की जाएगी।
सचिव की अपील
सचिव जनगणना दीपक कुमार ने अधिक से अधिक लोगों से 10 अप्रैल से शुरू होने वाली स्व-गणना में भाग लेने की अपील की है। उन्होंने बताया कि राज्यपाल और मुख्यमंत्री भी स्व-गणना प्रक्रिया में भाग लेंगे।
प्रेसवार्ता में संयुक्त निदेशक एसएस नेगी, उप निदेशक तान्या सेठ, आरके बनवारी, प्रवीन कुमार और पीआईबी के सहायक निदेशक संजीव सुंद्रियाल भी उपस्थित रहे।
