देहरादून। सत्ता में वापसी की रणनीति बना रही कांग्रेस को इस समय मजबूत और जमीनी कार्यकर्ताओं की जरूरत है, लेकिन प्रदेश संगठन में पदों को लेकर खींचतान के चलते प्रदेश कांग्रेस कमेटी (पीसीसी) का गठन अब तक नहीं हो पाया है।

सूत्रों के अनुसार, पार्टी हाईकमान 2027 के चुनावी मुकाबले को ध्यान में रखते हुए एक सधी और छोटी टीम बनाना चाहता है, जिसमें ऊर्जावान और दमदार नेताओं को जिम्मेदारी दी जाए। हालांकि, पद पाने की होड़ के कारण पीसीसी गठन लगातार टलता जा रहा है।

2022 से नहीं हुआ पीसीसी का गठन

वर्ष 2022 के बाद से प्रदेश कांग्रेस कमेटी का नया गठन नहीं हो सका है। पूर्व अध्यक्ष प्रीतम सिंह के कार्यकाल में प्रदेश कार्यकारिणी बनाई गई थी, जिसमें 200 से अधिक पदाधिकारी शामिल थे। इसके बाद अध्यक्ष बदले गए, लेकिन संगठनात्मक ढांचे में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ।

अध्यक्ष पद पर रहते हुए करण माहरा ने नई टीम बनाने की कोशिश की, लेकिन हाईकमान ने इस पर अंतिम निर्णय नहीं लिया।

पुरानी टीम के सहारे लड़े चुनाव

पुरानी टीम के साथ ही पार्टी ने लोकसभा चुनाव के अलावा मंगलौर, बदरीनाथ और केदारनाथ विधानसभा उपचुनाव लड़े। इनमें कांग्रेस को मंगलौर और बदरीनाथ सीट पर जीत मिली।

अब हाईकमान ने प्रदेश कांग्रेस की कमान गणेश गोदियाल को सौंपी है। 16 नवंबर 2025 को उन्होंने पदभार ग्रहण किया, लेकिन अब तक नई पीसीसी की घोषणा नहीं हो सकी है।

छोटी और सधी टीम पर मंथन

दिल्ली में पीसीसी गठन को लेकर कई दौर की बैठकों के बावजूद अंतिम सहमति नहीं बन पाई है। सूत्रों का कहना है कि इस बार छोटी और जिम्मेदारी तय करने वाली टीम बनाने की रणनीति है।

हालांकि, प्रदेश के वरिष्ठ नेताओं ने अपने-अपने समर्थकों की सूची हाईकमान को सौंप दी है, जिससे संगठनात्मक संतुलन साधना चुनौतीपूर्ण हो गया है। यही कारण है कि पीसीसी का गठन फिलहाल अधर में लटका हुआ है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि 2027 की तैयारियों को देखते हुए कांग्रेस को जल्द ही संगठनात्मक ढांचे को अंतिम रूप देना होगा, ताकि जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं में स्पष्ट संदेश जा सके।

Spread the love
error: Content is protected !!