देहरादून। उत्तराखंड में फर्जी प्रमाणपत्रों के आधार पर एमबीबीएस में दाखिले का मामला लगातार गहराता जा रहा है। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित श्रेणी से जुड़े कथित फर्जी प्रमाणपत्रों के इस्तेमाल की जांच के बीच एचएनबी उत्तराखंड चिकित्सा शिक्षा विश्वविद्यालय ने ऐसे अभ्यर्थियों के दाखिले निरस्त किए हैं। 28 सितंबर की उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, विश्वविद्यालय ने अब तक 15 एमबीबीएस दाखिले रद्द किए हैं।

 

मामले में देहरादून पुलिस की एसआईटी जांच कर रही है। प्रारंभिक जांच में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाणपत्रों में कथित अनियमितताओं के साथ दस्तावेजों के सत्यापन और प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया भी जांच के दायरे में है। एसआईटी ने संबंधित दाखिलों से जुड़े दस्तावेज भी कब्जे में लेकर पड़ताल शुरू की है।

 

मामले की जांच के दौरान यह सवाल भी उठ रहा है कि जिन प्रमाणपत्रों के आधार पर एमबीबीएस में दाखिले लिए गए, उनका सत्यापन किस स्तर पर हुआ और कथित फर्जी दस्तावेज जांच प्रक्रिया में पकड़ में क्यों नहीं आए। एसआईटी आवेदन से लेकर सत्यापन और प्रमाणपत्र जारी होने तक की प्रक्रिया की पड़ताल कर रही है।

 

जांच में कुछ मामलों में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के नाम और पेंशन भुगतान आदेश (पीपीओ) नंबर को लेकर भी विसंगतियां सामने आने की जानकारी है। एक ही पीपीओ नंबर का अलग-अलग अभ्यर्थियों के दस्तावेजों में इस्तेमाल किए जाने की बात भी जांच में सामने आई है। एजेंसियां अब संबंधित रिकॉर्ड का मिलान कर रही हैं।

 

फर्जी प्रमाणपत्रों के आधार पर दाखिला लेने वाले अभ्यर्थियों के खिलाफ कार्रवाई के साथ-साथ यह भी सुनिश्चित किया जा रहा है कि आगामी काउंसलिंग में विवादित या अपात्र प्रमाणपत्रों के आधार पर सीट आवंटित न हो। चिकित्सा शिक्षा विभाग के अनुसार, जिन सीटों पर दाखिले निरस्त किए गए हैं, वहां नियमों और मेरिट के आधार पर अन्य पात्र अभ्यर्थियों को अवसर दिया जाएगा।

 

मामले में फर्जी प्रमाणपत्र तैयार करने और उन्हें जारी कराने की प्रक्रिया में शामिल लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। एसआईटी यह पता लगाने में जुटी है कि प्रमाणपत्र किस स्तर पर तैयार हुए, सत्यापन प्रक्रिया में क्या हुआ और क्या इस पूरे प्रकरण में एक से अधिक लोगों की भूमिका रही।

 

वहीं, प्रमाणपत्रों के सत्यापन में राजस्व विभाग के स्तर पर होने वाली प्रक्रिया भी जांच के दायरे में है। अधिकारियों की भूमिका और दस्तावेजों के सत्यापन में किसी तरह की चूक हुई या नहीं, इसका पता जांच पूरी होने के बाद ही चल सकेगा।

 

मामला सामने आने के बाद राज्य में एमबीबीएस दाखिला प्रक्रिया के दौरान जमा किए जाने वाले श्रेणी, स्थायी निवास और अन्य प्रमाणपत्रों के सत्यापन को लेकर भी निगरानी बढ़ाई गई है। एसआईटी की जांच आगे बढ़ने के साथ मामले से जुड़े अन्य तथ्य सामने आने की संभावना है।

Spread the love
error: Content is protected !!