देहरादून।प्रदेश में कोयला और जल आधारित विद्युत गृहों से उत्पादन कम होने के कारण बिजली संकट गहराने लगा है। पीक आवर्स के दौरान राज्य में औसतन 350 मेगावाट बिजली की कमी देखी जा रही है, जिसके चलते कई क्षेत्रों में आपातकालीन कटौती करनी पड़ रही है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार बिजली कमी का मुख्य कारण राष्ट्रीय स्तर पर कोयला आधारित उत्पादन और पावर एक्सचेंज से बिजली की सीमित उपलब्धता है। इसके अलावा राज्य और केंद्रीय जल विद्युत परियोजनाओं से उत्पादन घटा है। नदियों में जल प्रवाह कम होने से पिछले साल की तुलना में इस सितंबर में 250 मेगावाट तक कम उत्पादन हो रहा है।

वहीं टिहरी पंप स्टोरेज प्लांट की दो इकाइयां तकनीकी खराबी के कारण बंद हैं, जिससे पीक आवर में 100 मेगावाट क्षमता प्रभावित हो रही है। पावर एक्सचेंज में अधिकतम दर पर भी अतिरिक्त बिजली नहीं मिल पा रही है। शाम के पीक आवर में पावर ग्रिड की फ्रीक्वेंसी 49.50 हर्ट्ज तक गिर रही है, जिसके चलते NRLDC ने ओवरड्रॉ पर भी रोक लगा दी है।
बिजली की संभावित कमी को देखते हुए UPCL की प्रबंध निदेशक ने सोमवार को अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। बैठक में अधिकारियों ने बताया कि अन्य राज्यों की तुलना में उत्तराखंड में स्थिति बेहतर है, इस पर प्रबंध निदेशक ने कड़ी नाराजगी जताई।
प्रबंध निदेशक ने एक सप्ताह के भीतर स्थिति में सुधार लाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही सभी क्षेत्रीय इकाइयों को मेंटेनेंस के लिए विशेष अभियान चलाने और नए निर्माण व प्रोजेक्ट के कामों के लिए अलग से बिजली कटौती न करने के सख्त निर्देश दिए गए हैं।
